Yes,I love you!

Love

Yes,

I love you.

And,

I want to touch you ever.

I love your body smell more than a perfume.

And I love to listen your voice

more than any melody….

I want to share my pillow with you.

And

I want to say you “Goodnight” every night.

And  I want to wake up with your beautiful morning kiss.

Suraj Sharma ✍🙏

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तुम मुझमें जिंदा हो! ( You are in my soul)

Love

​अरे जानती हो,

कल पुरानी किताबों को बेचने जा रहा था मैं,
उन किताबों में एक किताब मिली मुझे।

जो वर्षों से उस बोरी में बंद होने के,बाद भी

नई जैसी लग रही थी।

बस उसपे कुछ धूल जम गई थी।
मैंने धूल को साफ कर के,खोला तो

एक पन्ने पे तुम्हारा नाम लिखा था।
तुम्हारा ही नाम लिखा था,

और जानती हो,

उस सियाही में से तुम्हारे बदन की खुशबू भी आ रही थी।

अरे वही खुशबू,

जो कभी मेरे सांसों में घुल के मेरे रक्त को

भी तेरे संग संग बहना सिखाया था,

अरे वही खुशबू,

जिसकी महक शायद आज के किसी परफ़्यूम में नही है।

और जानती हो,

कल से तुम बहुत याद आ रही हो,

कल से मुझे वो कॉलेज,वो कैंटीन ,वो बस,

और सबसे ज्यादा तो 

कॉलेज के रास्ते मे पड़ने वाली वो 

मोहन की,

चाय की दुकान याद आ रही है।

तुम्हें याद तो होगा ही ना,

हम अक्सर कॉलेज से लौटते वक्त,

वहाँ पे चाय पिया करते थें।

और तुम्हें ये भी तो याद होगा ना,कि 

हमने पहली बार किश वही पे किया था।।

अच्छा सुना ना,

कल मुझे वो सर भी याद आये थें,

जो अक्सर हमें क्लास से बाहर निकल देते थें,

और हम मज़े से जा कर लायब्रेरी में बैठ कर,

एक दूसरे को देखतें थें।

और क्या तुम्हें वो भी तो याद होगा,

जब मेरा फोन तुम्हारी मम्मी ने उठा लिया था,

और मैंने उन्हें जानू बोल दिया था,

और तुमको चार दिन कॉलेज नही आने दिया था।

अरे हाँ जानती हो,

एक बात तो तुमसे बताना मैं भूल ही गया,

कल जब उस किताब को आगे पलटा,

ना तो उसमें तुम्हारा एक ख़त भी मिला,

जिसमें तुमने रात भर जग के,

 मेरे लिए ढेर सारा दिल बनाया था,

और जिसमे तुमने लिखा था,

हम कभी एक दूसरे से दूर नही होंगें।

और जानती हो,

कल उस ख़त को पढ़ के,

मैं राधे कृष्ण के उस मंदिर में भी गया था,

जहाँ हमने एक दूसरे से कभी ना बिछड़ने की

कसम खाई थी,

और जहाँ पे तुमने एक बार फिर से मुझे,

भगवान के सामने प्रोपोज़ किया था।

अरे तुम ठीक कहती थी,

मैं ना एक नंबर का पागल हूँ,

अब तुम ही बताओ,

जब तुम इतने सालों किसी भी दिन मेरे 

ख़्वावों में आना नही भूली,तो

इन सब बातों को कैसे भूल जाओगी।

अच्छा सुनों,

मैं कल जरा भी नही रोया था,

तुम्हें याद करके।

तुमने ही कहा था ना कि,

तुम मर के भी मुझमें जिंदा रहोगी।

और तुम नही चाहती कि मैं तुम्हें याद

करके रोऊँ,

और हमारा प्यार झूठा हो जाये,

तू देख लो मैं कल भी नही रोया था,

आज भी नही रोया हूँ।

और मैं तो तब भी नही रोया था,

जब तुमको अपनी गोद मे उठा के,

 कब्र तक ले गया था।

अच्छा सुनों अब रात को मिलना,

मैं तुम्हें सब कुछ बताऊंगा।

Suraj Sharma ✍🙏

pic credit– Google

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Feelings of love

Love

Your body and my touch are not just relationship,

It is the bond of two bodies in one soul.

Your lip and my kiss are not only sensual feeling,

It is bond of two lips.

Your arms and my hug are not only  sympathy,
It is bond of two hearts in a heartbeat.

Your night and my bed are not only lust,

It is  bond of two nights in a beautiful night.

Your body and my touch are not just relationship,

It is the bond of two bodies in one soul.

Suraj Sharma ✍❤

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तवायफ़

Love

दिखी मुझे एक लड़की।

खड़ी सड़क पे वो इंतज़ार में है,

जिंदगी के गंदे शिकार में है।

कोई उसे आ के ले जाये रंगीन

अपनी रात बनाये।

एक प्यारी सी लड़की फंसी जिस्म के कारोबार में है।

मैं पास गया उसके,

उससे पूछा प्रिये कैसी हो,

बोली साहब गली ना दो,

कहा चलना है ये बोलो।

मैं एक गंदी लड़की हूँ,

बस एक रात की मस्ती हूँ।

प्रिये सुनना गाली सा लगता है,

मैं तो वैश्या की बस्ती हूँ।।

आज तक पूछा ना किसी ने 

इस तरह से हाल मेरा,

बीतता है बिस्तर पे हर एक साल मेरा।

ना कोई मेरी कहानी है,

पैसे पे बिकती मेरी जवानी है।

हूँ मैं एक गंदी लड़की ,

फिर भी शरीफों के संग सोयी हूँ।

साहब हर एक रात के बाद,

सुबह को जी भर के रोयी हूँ।

मेरा दिल नही करता हर रात सोने को,

पर इस रात के सिवा कुछ भी नही है,

खाने को।

हर रात सो सो के जी रही हूँ मैं।
सुन के उसका उत्तर मैं बोल ना सका।

ये हकीक़त हमारे बाजार में है,

दिखी मुझे एक लड़की।

खड़ी सड़क पे वो इंतज़ार में है,

जिंदगी के गंदे शिकार में है।

कोई उसे आ के ले जाये रंगीन

अपनी रात बनाये।

एक प्यारी सी लड़की फंसी जिस्म के कारोबार में है।

Suraj Sharma ✍✍

Pic credit–Google baba

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A romantic night

Love

Yes, I crave,

Warmth of your touch

Which is still on my back.

Weight to you next me,

And the scent of your pillow,

whose fragrance is in my fingers

Yes, I crave,

Your kiss on my lips.

And your smile,

Which is in my heart..

Yes, I Crave,

The night of romance

The feeling of love

The Wish of erotic.

& you too….

Suraj Sharma✍✍

Pic credit–Google , Concept credit-A writer

बारिश(Barish)

Love

यूँ बारिश में भीगना तेरा,

यूँ भींगी हुई साड़ी में सिमटना तेरा।

हमें पागल कर देता है जाने ज़ा,

दाँतों से होंठों को दबाना तेरा।
कभी हिज़ाब पहन के शर्माना तेरा,

कभी बेपर्दा होके मेरे करीब आना तेरा,

कभी खामोश रहना,

कभी इशारों से बुलाना तेरा,

हमें पागल कर देता है जाने ज़ा,

दाँतों से होंठों को दबाना तेरा।
कभी बेवजह ही मुस्कुराना तेरा,

कभी छोटी सी बात पे अस्क बहाना तेरा,

कभी दुप्पटे को हवा में उड़ाना,

कभी निगाहों से मय छलकाना तेरा,

हमें पागल कर देता है जाने ज़ा,

दाँतों से होंठों को दबाना तेरा।
कभी रात में चांदनी बन के बिखरना तेरा,

कभी सुबह को मेरे साथ जगना तेरा,

कभी वाद-ए-वफ़ा के करना,

कभी मुझसे रुसवा होना तेरा तेरा,

हमें पागल कर देता है जाने ज़ा,

दाँतों से होंठों को दबाना तेरा।।
यूँ बारिश में भीगना तेरा,

यूँ भींगी हुई साड़ी में सिमटना तेरा।

हमें पागल कर देता है जाने ज़ा,

दाँतों से होंठों को दबाना तेरा।।

Suraj Sharma✍🙏

Pic credit–Google

सर्दियाँ (Sardiyan)

Love

तेरे होंठों की नर्मियाँ, 

तेरी सांसों की गर्मियां 

तेरे बाहों की मस्तियाँ

हमे आज भी याद है तेरे जिस्म को

छू कर सुलगती सर्दियाँ।
तेरे जुल्फो में सिमटी काली घटा,

तेरे हुस्न की हर क़ातिल अदा।

तेरी महकती सुबह में,

बिखरी हर रात जवां।

तेरी जवानी के शबाब का कारवाँ।

और इस शबाब से जलती बस्तियाँ।

हमे आज भी याद है तेरे जिस्म को

छू कर सुलगती सर्दियाँ।।
काली रात में भी तेरा सजना सवरना,

वस्ल की बात पे गालों का गुलाबी होना।

सिमट के रात की तन्हाई में,

तेरा आहें भरना।

छलका के लबों से मय,हमें शराबी करना।

और वो चेहरे की मासूमियत,और

निगाहों की गुस्ताखियां।

हमे आज भी याद है,तेरे जिस्म को

छू कर सुलगती सर्दियाँ।।
तेरे होंठों की नर्मियाँ 

तेरी सांसों की गर्मियां 

तेरे बाहों की मस्तियाँ

हमे आज भी याद है तेरे जिस्म को

छू कर सुलगती सर्दियाँ।।

Suraj Sharma ✍💕

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निशा(Stop Rape)

Love

वो चिल्लाती रही दर्द से,

लेकिन उन्हें मज़ा आ रहा था।

वो अकेली लड़की और वो तीन दरिंदें जो हमारे सभ्य समाज के नाम पे धब्बा हैं।

हाँ,

मैं सामूहिक बलातकार की ही बात कर रहा हूँ।

कुछ पल के हवस के लिए किए गये एक सामूहिक बलात्कार की बात कर रहा हूँ।

उसी हवस की बात कर रहा हूँ जिसे अंग्रेजी भाषा में सेक्स कहतें हैं।

आपको गुस्सा आया होगा ना या फिर बहुत अजीब लगा होगा ना सेक्स शब्द पढ़ के।

और मैंने सुना है सेक्स लिखना बोलना हमारे यहाँ बहुत बुरी बात होती है।

और वो भी मेरी उम्र में तो इसे बोलना या लिखना मतलब चरित्रहीन वाली बात होती है।

ये बहुत खराब शब्द है ऐसा मैंने सुना है,और इसे बड़ों के सामने या ऐसे खुलेआम नही लिखना बोलना चाहिए ये भी मैंने सीखा है।

और मैंने भी जरा भी इन सीख और मर्यादा का ख्याल नही किया और लिख दिया ऐसे ही इसे।

आप लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगें।
लेकिन मेरे बारे में गलत सोचने से पहले जरा रुकिए,

जरा सोचिए’

जब तीन,चार,पाँच…….
लोग मिल के खुली सड़क पे,चलती बस में, रेलगाड़ी के डिब्बे में, माँ के सामने बेटी का,बेटी के सामने माँ का,पिता के सामने बेटी का,पति के सामने पत्नी का……हाइवे पे कहीं भी  समूह में जुट के एक बेटी,माँ,पत्नी,बहन,दोस्त,भाभी……..बलात्कार करते हैं तब शर्म नही आती है इंसानियत को।

तब ये सीख कहाँ जाती है,

और तब कोई क्यों नही बचाता है उन्हें उन दरिंदों से,क्या वे दरिंदें इंसान नही होतें हैं और क्या उन्हें सीख नही मिली होती है बचपन में कई इस शब्द को अगर बोलना लिखना इतना बुरा है तो वो जो कर रहें है वो कितना बुरा है।

अगर तब उनको को शर्म नही आती है तो मुझे भी लिखने में नही आती शर्म।।
तो आइए मिलते हैं एक और अबला से जिसका कसूर बस इतना है कि वो जवान हो गयी।

उसका शारीरिक विकास हो गया,वो भारत मे पैदा हुई है और सबसे बड़ी बात यह है कि उस पागल ने खुद को इस देश की सड़कों पे महफ़ूज समझ लिया।
निशा अपने ट्यूशन से वापस आ रही थी,शाम को वो कंप्यूटर क्लास जाती है जिससे उसे वापस आने में 9 बज जातें हैं।

पर दिल्ली जैसे बड़े शहर में 9 कोई ज्यादा नही होते।

लेकिन जब बात एक लड़की की हो तो इस देश में हर पल खतरा होता है।

निशा रोज़ की तरह ही अपनी साईकल से घर की तरफ आ रही थी।

निशा के घर और ट्यूशन के बीच महज़ कुछ ही किमी की दूरी है।

लेकिन उसे घर जाते वक्त एक झड़ियों जैसा पार्क के रास्ते से होकर गुजरना होता है।
निशा बहुत ही मॉर्डन ख़्वाल वालो लड़की थी और बेपरवाह भी इसलिए आज के पहले उसे कभी भी इन रास्तों और पेड़ों से डर नही लगा।

आज भी उस पल तक वो इन रास्तों से नही डरती थी जब तक उसकी रूह को तीन दरिंदों ने छुआ नही था।

निशा रोज़ के जैसे ही कान में लीड लगाए हुए गाना सुनती अपनी साईकल लेके चली आ रही थी।

तभी पार्क की झड़ी की तरह से तीन लड़के उसके साईकल के सामने आ के खड़ा हो गयें।

तीनों लड़कों को सामने खड़ा देख निशा ने तुरंत साईकल का ब्रेक लगाया और कान से लीड निकल के गुस्से से बोली—
“”क्या प्रॉब्लम है भाई,ऐसे बीच में क्यूँ खड़े हो।

किसी ने जवाब नही दिया।
ऐसा नही था कि वो सड़क एक दम से सुनसान थी बल्कि लेकिन उस वक्त एक भी गाड़ी नही गुजरी वहाँ से।
निशा दुबारा से कुछ बोल पाती इससे पहले ही उन तीनों ने उसे दबोच लिया।
निशा चिल्लाई क्या कर रहे हो तुम लोग मुझे छोड़ो,,,,,,,,,,,
लेकिन उन बदमाशों ने निशा को पकड़ के पास में ही खड़ी अपनी गाड़ी में भर के चल दिये।

निशा की साईकल किताब सब सड़क के किनारें बिखरा पड़ा था।

वहां से बहुत सारी गाड़ियाँ गुजरी बहुत से लोग गुजरें लेकिन खुद के जल्दी के निशा के समान की तरफ किसी का। भी ध्यान नही गया।

जिसने देखा भी उसने नज़र अन्दाज कर दिया।
उधर उन तीन दरिंदों ने निशा को गाड़ी में भर के एक जगह पे ले गयें जहाँ पे एक एक कार तीनों ने उसके साथ बलात्कार किया।
केवल उन तीनों ने ही नही वहाँ पे पहले से महज़ूद एक और सख्स ने निशा की आबरू सामूहिक तौर पे नीलम की।
निशा जो कि अभी महज़ सोलह वर्ष की एक प्यारी सी लड़की किसी के हाथों की राखी किसे के सपनों की बेटी किसी की जिंदगी थी।

वो उन दरिंदों के सामने गिड़गिड़ाती रही रहम की दुहाई देती रही लेकिन उनका दिल नही पिघला।

वो अपने हवस के मज़े लेते रहें और एक जिंदगी को खत्म करते रहें।
जब निशा उन दरिंदों के जुल्म से बेजान हो गयी।

तब उन्होंने उसे उसी जगह पे ला के फेंक दिया जहाँ से उसे ले गयें थें।

निशा की जिंदगी बर्बाद करने वाले दरिंदें निशा से बहुत बड़े थें,

हर एक गुनहगार तीस साल के ऊपर था मतलब की निशा के दुगने उम्र का एक तौर पे आप कह सकते हो कि निशा के पापा या चाचा के उम्र का लेकिन हकीकत निशा का बलात्कार था।
बगल बिखरी किताब साईकल के पास फेंकीं हुई निशा हमारे पूरे समाज के सफेद शर्ट पे पड़ी उस स्याही की जैसी थी जिसे कितना भी धुल ले लेकिन अब वो छूटेगी नही।

जिस वक्त उन दरिंदों ने निशा को गाड़ी से फेंका उस वक्त उनकी गाड़ी के पीछे कई और लोग भी आ रहें थें लेकिन किसी ने उनको नही रोका।
निशा की जिंदगी तो खत्म हो गयी उस रात के बाद ।

खत्म हो गयी उसके इंजीनियर बनने की पढ़ाई,

और खत्म हो गयी एक भाई के हाथों पे हर साल बंधने वाली राखी।

अब निशा दुबारा इस धरती पे पैदा नही होना चाहेगी,और ना ही उसके माँ-पापा चाहेगें कि किसी भी जन्म में उन्हें लड़की हो।

लेकिन हमने भी बहुत कुछ किया निशा के इस सामूहिक बलात्कर के विरोध में,

अरे क्यूँ नही किया”!

मोमबत्तियां लेके जन सभा निकली,

टीवी पे न्यूज़ सुना,नेताओं का भाषण सुना।

और उसके नाम का शेम के साथ फेसबुक,इंस्टाग्राम और बहुत सारी जगहों पे पोस्ट भी किया।
लेकिन एक चीज़ बस नही किया वो था खुद को बदलना,बस हम एक दिन बाद भूल गयें निशा को फिर वैसे ही जीने लगें जैसे पहले जीते थें।

फिर से हम वैसे हो गयें सड़क पे हो रही हर
घटना को अनदेखा करने लगें।

जब तक सोच नही बदलेगी तब तक हमारे आस पास ही जी रहे ऐसे दरिंदों निशा की आबरू नीलाम करते रहेंगें।
Suraj Sharma✍✍
🙏Stop Rape she is not machine of sex.✍