आत्मविश्वास

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​””ये जिंदगी की जंग है यहाँ खुद को बुलन्द करो,            कोई नही देगा साथ तुम्हारा उड़ने के लिए खुद से पहल करो।””

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किसी भी काम को करने के लिये ये जरूरी है कि आपको खुद पे भरोसा हो,और वो एक ऐसा अटल भरोसा होना चाहिए जो किसी भी परिस्थिति में विचलित न हो।

इसलिए आत्मविश्वास एक ऐसा मंत्र है जो इंसान को हवाई जहाज चलाने की हिम्मत दे सकता है और अगर न हो तो इंसान छत पे भी खड़ा नही रह सकता।

आत्मविश्वास इंसान के अंदर छुपे डर और नकारात्मक विचार को खत्म करती है।

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सभी जानतें हैं एक अकेला सिकन्दर पूरी दुनिया पे राज किया उसकी इस जीत में उसे कोई दिव्य शक्ति नही मिली थी बस उसे खुद पे और खुद की भुजाओं पे भरोसा था और उसका यही आत्मविश्वास उसे विश्व विजेता बना गया।

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जब तक आप खुद की काबिलयत पे भरोसा नही करोगे तब तक आप कितना भी कुछ कर लो आपको वो चीज नही मिलेगी जिसकी आपको चाह है।

इसलिए आप जो भी करना चाहतें हैं उसके लिए,

“”आपके अंदर उस काम को लेके उतना आत्मविश्वास होना चाहिए जितना सूरज की रोशनी को लेके दिन में होता है,

जितना चाँद और तारों को लेके रात में,

और जितना आत्मविश्वास अभिमन्यु को खुद पे था।””

और जिस दिन आपके काम को लेके आपके अंदर इतना आत्मविश्वास आ गया उस दिन आपको दुनिया की कोई ताकत नही रोक सकती है।

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आत्मविश्वास के बदले ये संसार आपको कभी कभी पागल भी समझ सकती है।

फिर भी आपको बस खुद पे भरोसा रखना चाहिए और अपना काम करते रहना चाहिए।

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आपने उस जगदीश चंद बोस जैसे महान वैज्ञानिक का नाम तो सुना ही होगा,जब उन्होंने अपने एक शोध को एक सभा में  बताया तो वहाँ उपस्थित सारे वैज्ञानिकों ने  उनका मज़ाक बनाया था,पर उन वैज्ञानिकों के द्वारा बनाये गये मज़ाक का बोस जी पे कोई फर्क नही पड़ा क्योंकि उन्हें खुद के काम और खुद पे भरोसा था,और उन्होंने जब अपने इसी आत्मविश्वास से अपनी बात को सिद्ध कर दिया तो वहाँ पे उपस्थित सारे लोगो की हँसी ताली में और बोस जी की तारीफ में बदल गयी।”””

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तो लोग क्या सोचतें हैं आपके आत्मविश्वास का इस  बारे में सोच के अपना समय नष्ट करने से बेहतर होगा आप अपने अंदर के आत्मविश्वास को लेके अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते रहिये।

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आत्मविश्वास ही वो होता है जो एक मामूली से इंसान को पर्वत के शिखर पे खड़ा कर देता है।

इसलिए कभी भी किसी भी परिस्थिति में अपने आत्मविश्वास को कम न होने दें उसे हर पल खुद में जीवित रखें।

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एक बार एक लड़का था वो पढ़ाई में बहुत अव्वल था उसकी बुद्धि बहुत तेज़ थी हर बार वो क्लास में टॉप करता था।

पर जब भी कभी स्कूल में कोई साहित्यिक कार्यक्रम होता तो वो उसमें हिस्सा नही लेता था क्योकिं वो जब भी लोगों के सामने जाता उसके पाँव काँपने लगते थें।

और इस कारण से वो स्कूल में प्रेयर करवाने और स्टेज पे खड़ा होंके कुछ बोलने से हर पल बचता फिरता था उसके अंदर काबिलियत की कोई कमी नही थी बस कमी थी तो आत्मविश्वास की जिसकी कमी के कारण वो इन चीजों से डरता था।

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इसलिए हर किसी के अंदर काबिलियत होती है बस जरूरत होती है आत्मविश्वास की जिसके बदौलत आप दुनिया को खुद से रुबरूं करा सकें।

और आप भी तब तक सफलता और कामयाबी की के मंच तक नही पहुँच सकते जब तक अपने आत्मविश्वास नही होगा।

काम कुछ भी हो आत्मविश्वास जरूरी होता है।

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1

अपने अंदर की आवाज को सुनें उसके बारे में विचार करें और जो भी कार्य करें उसे पूरे आत्मविश्वास से करें।

2.

शिखर पे जाने के लिए खुद पे भरोसा होना चाहिए।

3.

आत्मविश्वास हो तो एक इंसान हवाई जहाज भी उड़ा सकता है और ना हो तो सायकिल भी नही चला सकता।

4.

आत्मविश्वास मतलब जो काम आप कर रहे ही या जिसे आप करना चाहते हो उसको लेके आपके अंदर एक ऐसा जुनून होना चाहिए कि इस काम को मुझसे बेहतर कोई और नही कर सकता है।

5.

आत्मविश्वास ही आपको सिकंदर बनता है,वरना जिंदगी सबकी आम है।

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      “”जीने का एक अलग हुनर तलाशो,

शिखर वे जाना है तो खुद में सिकंदर तलाशो।””

Suraj Sharma

(आप अपने प्रश्न और कोई सुझाव मुझे e-mail कर सकतें हैं।और अगर आपको ये आर्टिकल पसन्द आया हो तो इसे शेयर करें।)

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We Life & Dream

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हर कोई परेशान होता है अपनी जिंदगी में हो रहे उतार चढ़ाव से।

पिछले कुछ महीनों से मैं न चाह के भी इसी का हिस्सा बनता जा रहा था।

मुझे लगा खुद को और मेरे जैसे परेशान लोगों के लिए एक सकारत्मकता से भरा आर्टिकल लिखना चाहिए।

मैं ये तो नही कहता कि आगे जो भी मैं लिख रहा हूँ उससे आपकी जिंदगी बदल सकती है।

हाँ पर मैं एक बात जरूर बता दूं,आगे जो भी मैं लिखा हूँ उसे पढ़ के आपको संघर्ष और सफलता के कुछ पहलू को जानने में थोड़ी सी मदद ढेर सारी सकरात्मक ऊर्जा के साथ मिलेगी।

  • सपने और हकीकत–

हर इंसान की जिंदगी के दो पहलू होतें हैं,एक तो वो जो वो उस समय होता है।

और एक वो जो कभी न कभी हर किसी के आंखों में खुद के लिए सजा होता है,वो होता है उसका सपना जो कहीं न कहीं उसकी हकीकत की जिंदगी से परे होता है।

इंसान के ख्वाब और उसकी हकीकत जिंदगी में अक्सर बहुत बड़ा फासला होता है।

जैसे कि एक आम गाँव मे रहने वाला किसान का बेटा जिसके पापा महज एक छोटे से किसान हैं,पर उसका ख्वाब उसके हकीकत की जिंदगी से कहीं बड़े और अलग हैं उसे क्रिकेटर बनाना है,पर उसका समाज और उसका घर परिवार इतना नही सोच सकता उसके हकीकत की जिंदगी का सच एक अच्छी जिंदगी से है जो अक्सर सरकारी नौकरी पे आ के पूरी हो जाती है तो उस किसान के बेटे की हकीकत की जिंदगी एक अच्छी जिंदगी या फिर कहें तो परिवार की हकीकत सरकारी नौकरी है।

तो ऐसे होतें हैं सपने जो कभी भी हमारी निजी जिंदगी से दूर दूर तक कोई ताल्लुक नही रखतें हैं।

पर यहीं से होता है हर इंसान के जिंदगी की सफलता के सफर का आगाज़।

आपके सपने और आपकी हकीकत जिंदगी के सच ही तय करतें हैं कि आपको आगे अपनी जिंदगी में  उड़ान है या फिर दौड़ना है सारा कुछ यहीं से तय होता है


  • फैसलें🌟

कहतें हैं ना जो अच्छे फैसलें नही लेतें वो अच्छे इंसान नही होतें।

और फैसले ही आपको शिखर पे भी बिठाते हैं और फैसलें ही आपको जमीन पे।

तो आपके सपनें आपकी खुशियाँ और आपकी सफलता सब कुछ आपके फैसले पे ही निर्भर करता है।

इस लिए अगर आप खुद के फैसले खुद से नही ले सकतें तो कभी भी आप खुद के सपनों को पूरा नही कर पायेंगे।

अक्सर हम देखतें हैं लोग जितना बड़ा कार्य करने  जातें हैं उतना ही ज्यादा संकोच और खुद से डरे होतें हैं और इस डर और संकोच के कारण ही कभी कभी हम लोग अपने जीवन के अहम फैसलें दूसरों की रजा मंदी पे छोड़ देते हैं।

और हम निर्भर हो जातें हैं एक तरह से दूसरों पे अपने बड़े फैसलों के लिए।

जीवन के अहम फैसलें जब तक हम खुद से नही लेंगें हम जीवन के उस अहम कार्य को कभी भी पूरा नही कर पायेंगे।

क्योकिं सपने हमारे खुद के होतें हैं हमें पता होता है हम इसको लेके कितना उत्साहित हैं या कितना नही,हमारे अलावा अन्य किसी को नही पता होता है कि हम किस काम को अच्छे से कर सकतें हैं।

और जिस इमारत की नींव मजबूत नही होगी वो इमारत कभी भी ऊँची नही बन सकती और साथ ही साथ वो छत भी टूट जाया करतीं हैं जो दूसरी छत के दीवारों पे लादी गयीं हो।

इसलिए अगर आपको अपने सपने पाने हैं अगर आपको सच में कामयाबी पानी है तो फैसलें खुद से लेना सीखो वो अलग बात है कि आपके फैसले गलत साबित होतें हैं या सही पर जब आप खुद से फैसला करोगे तो उस फैसले को लेकर आप से ज्यादा आत्मविश्वासी दूसरा कोई नही होगा।।

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“””सपनों और हकीकत के बीच ,

फैसला लेते वक्त,अगर 

सोच विचार बढ़ जाये 

तो अक्सर फैसलें कमजोर हो जातें हैं।”””

1, अक्सर जिन्दगीं में  हर किसी के पास उतने साधन नही होतें जिससे कि वो अपने सपने पूरे कर पाएं पर अगर खुद में हिम्मत और सपनों में सच्चाई हो तो हकीकत की जिंदगी और सपनों के बीच में सपनों को ही चुने।

2, मेहनत आदमी की तकदीर बदल देती है पर इंसान का टैलेंट उसकी तकदीर और तस्वीर दोनों बदल देता है।

3, जब इंसान कठिन परिश्रम करता है तो अक्सर पहाड़ भी रास्ते दे देते हैं।

पर जब टैलेंट कठिन परिश्रम करता है तो उसका मुकाबला दुनिया मे कोई नही कर सकता।

4, पैसा कमाने के लिए कभी भी खुद के सपनों को न ठुकराओ,क्योकिं सपनों के सफर में दर्द तो बहुत होगा पर जीत सिंकन्द वाली होगी।

5, हर इंसान को आप खुश रख पाओ ऐसा संभव नही होता इलिसलिये किसी को खुश रखने के वास्ते खुद के सपनों का न ठुकराओ।

6, लोग तभी तक आप को याद रखेंगे जब तक आप का ग्राफ ऊपर रहेगा इसलिए शोहरत की चाह रखने वाले कभी आलोचना से नही घबराते।

7, खुद से बातें करें और खुद को समझें।

8, अपना कार्य करते रहो दुनिया का कहती है क्या सोचती है इसकी परवाह किये बिना।

9, अपने सपनों को धोनी के उस जीत वाले छक्कों के जैसे बनाव जिसके तुम धोनी बानो।

10, सपने अगर बड़े हों तो चेहरे पे मुस्कराहट और निगाहों में आत्मविश्वास भी बड़ा होना चाहिए।

अगर ये आर्टिकल आपके नज़र से आपके लिए सहायक हों तो अपना राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें और साथ ही साथ इसे अपने फेसबुक पेज पे जरूर शेयर करें।

Suraj Sharma ✍🙏

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किताबों के दुनिया।

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मस्ती और ख्वाबों की दुनिया,

बहुत याद आती है वो किताबों की दुनिया।

💕

जब बोझे सा बैग होता था,

जब दोस्तों से रेस होती थी,

जब स्कूल की टिफिन शेयर होती थी,

जब पन्ने गिनने की डेयर होती थी।

जब कॉपी रफ़ और फेयर होती थी,

जब क्लास में केवल एक ही चेयर होती थी।

💕

उस चेयर पे पड़े डंडों की दुनिया,

बहुत याद आती है किताबों की दुनिया।

💕

जब हर गलती पे डांट पड़ती थी,

जब बहन साथ बैठ के रात में पढ़ती थी,

जब दुनिया हमारी शैतानी से डरती थी।

जब बगल वाली ऑन्टी शिकायत करती थीं।

💕

शरारत और शिकायतों की दुनिया,

बहुत याद आती है किताबों की दुनिया।

जब हर रोज़ ड्रेस में स्कूल जाना होता था,

जब टिफिन ना खाने का रोज़ बहना होता था।

जब दस रुपये में खुश होना होता था,

जब माँगे पूरी करवाने के लिए रोना होता था।

जब भूतों से डर के मम्मी के साथ सोना होता था,

जब पापा के साथ घूमने जाना होता था।

💕

पापा और मम्मी के वादों की दुनिया,

बहुत याद आती है,किताबों की दुनिया।

💕

हर रोज़ जब नए नए तरकीब हम सोचते थें,

जब जल्दी से बड़े होने के लिए रोते थें।

जब बिना वजह उसके संग खेलते थें,

जब नाम उसके साथ जोड़े जाने पे हम मुस्कुराते थें।

जब बिना सुर के गाने गाते थें,

जब सायकिल हम चलते थें।

जब पापा की थाली में खातें थें,

जब रिश्तों को हम निभातें थें।

💕

उम्र के उस इरादों की दुनिया,

बहुत याद आती है किताबों की दुनिया।

💕

जब फिजिक्स केमिस्ट्री हम रटते थें,

जब मैथ से डरते थें,

जब चॉकलेट पे मरते थें,

जब सारे सब्जेक्ट हम पढ़ते थें।

💕

मैथ के सवालों की दुनिया,

बहुत याद आती है वो किताबों की दुनिया।

Copyright—Suraj Sharma ✍🙏

इश्क (राघव जूही की कहानी)

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2nd Part👇

जूही पास हुई और वेलेंटाइन डे की पार्टी भी,पर सब कुछ सूना सूना सा था राघव के बिना।

आज एक माह बाद वापस राघव कॉलेज आया पर अब वो बिल्कुल बदल चुका था।

पहले से ज्यादा शान्त पर उसकी आँखों मे एक अलग प्रकार की इच्छा थी,वो इच्छा थी उसकी खोई हुई प्रतिष्ठा फिर से पाने की और बहुत आगे की करने की।

अभी भी वो जूही से गुस्सा नही है,बस थोड़ा सा शर्मिंदा है वो भी खुद से।

किसी ने कहा है,कि

‘”जिस इश्क में आशिक का दिल न जले वो इश्क सच्चा नही होता।'””

लेकिन इस एक महीने में एक चीज बदल गयी थी,आजकल जूही नही दिख रही थी।

राघव भी उसे ही ढूंढ रहा था,उसको एक नज़र देखने को,पर वो कहीं दिखाई नही दे रही थी।

तभी मेरी नज़र राघव पे पड़ी मुझे पता था राघव किसे ढूंढ रहा है।

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पिछले पंद्रह दिनों से जूही कॉलेज नही आयी है-,,मैंने राघव के बिन कुछ पूछे ही जवाब दिया।

पर क्यों भाई जी,,

राघव बेचैनी से मेरी तरफ देखते हुए बोला।

पता नही क्यूँ मेरे कलयुग के मजनू,पर मैंने सुना था कि एक कार एक्सीडेंट में वो घायल हो गयी थी।,-

मैंने कहा।

घायल हो गयी,और आपने हमे बताया नही,-

राघव ने और बेचैन होके मुझसे सवाल किया।

अरे बताने वाला था पर मैंने सोचा तुम परेशान होंगे,इसलिए नही बताया,वैसे भी उसका तो ये होना ही था उसने पापा ही इतना बड़ा किया है,,,”अपने गुस्से को संभलते संभलते मैं बोल उठा।

नही नही ऐसा न बोलो यार,वो दिल की अच्छी लड़की है,ख़ैर भगवान करें वो सलामत हो।,,,

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राघव का प्यार देख के मैं भी हैरान हो गया,

दिमाग और दिल दोनो एक ही सवाल पूछ रहें थें,

क्या किसी को इश्क इतना भी हो सकता है कि वो किसी के पाप को भूल जाये।

ख़ैर राघव अब जूही को एक नज़र देखने के लिए बेचैन था पर शायद उसका नसीब ठीक नही था,

जूही शायद ही अब कभी कॉलेज आती।

राघव भी अपनी पढ़ाई में लग गया,जब भी राघव खुश होता वो जूही की एक तस्वीर को देख के उसके संग खुशियां मना लेता पर वो जूही को भूल नही पाया था।

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28 अगस्त 2017

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एक साल बीत चुके हैं और हमारी डिग्रियाँ भी हमारे इंताजर में डीन की आफिस से बाहर आ चुकी हैं।

और एक बार फिर से वो समय आ चुका है जब अब तीन साल की मस्ती के बाद हमें अलग अलग खुद को तलाशना है।

और अब हम सब तैयार हैं अपने कंधों पे खुद का बोझा और जिम्मेदारी का बोझा उठाने को।

राघव और मैं आज उसकी कार से आये,अरे हम दोनों दोस्तों के बीच भी तो थोड़ी सी दूरी बढ़ जाएगी अब शायद ही हम कभी एक साथ तीन साल बिता पायें।हमने भी अपनी डिग्रियाँ ली,मैं भी अच्छे से पास हो गया,पर मेरे आशिक दोस्त ने अपनी पहली मोहब्बत से जरा भी बेवफ़ाई नही की,और हर बार की तरह इस बार भी टॉप कर दिया।

इस तरह पूरे कॉलेज में टॉप करके गोल्ड मेडल जीता मेरे दोस्त ने।

और फिर हमने दिन का अंत और एक दूसरे को अलविदा रामू चाचा की उसी चाय से की जिसे पी के हमने इस कॉलेज लाइफ की शुरुआत की थी।

मुझे जाते जाते एक शेर याद आ गया,

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“”होते हम आईना तो फिर से सूरत तेरी वही दिखातें,

फिर से ऐ दोस्त समय को पीछे ले आते।

फिर से किताबों में मुँह छिपा के,

हम दोनों वही बचपन वाला गाना गातें।”””

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दिसंबर 2017,

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राघव एक बहुत बड़ी कंपनी में जॉब के लिए आवेदन भरा था,

आज साक्षात्कार के लिए उसे कंपनी के आफिस से फोन आया था।

राघव ने सबसे पहले ये खुशखबरी फोन करके मुझे सुनाई।

मैंने भी उसे बेस्ट ऑफ लक बोला।

राघव आफिस पहुँच कुछ समय बाद उसे बुलाया गया,

राघव,”क्या मैं अंदर आ सकता हूँ?

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आइये,”

अंदर कुर्सी पे बैठी उस कंपनी की खूबसूरत और नवजवान युवती ने अपनी खूबसूरत आवाज में बोली।

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राघव जैसे ही अंदर गया और कुर्सी पे बैठी उस कंपनी की मालकिन को देख, उसके तो होश उड़ गयें।

मालकिन कोई और नही बल्कि जूही ही थी,जो अपने पापा का उनके व्यापार में हाथ बंटा रही थी।

जूही अपने पापा मम्मी की एक मात्र संतान थी,इस लिए सारा व्यापार अब उसके ही हाथ मे था।

जूही ने भी राघव को देखा।

बिना किसी पुरानी बात के वो राघव को बैठने के लिए बोली।

और राघव से भी उसी तरह से सवाल जवाब किये जैसा उसने अन्य आवेदकों से किया था,और अंत मे इंताजर करने को बोली।

राघव को डर था,कि वो शायद ही उसे इस पद के लिए चुने।

पर राघव बहुत समझदार था,उसने भी बिना किसी बात के सामान्य तरीके से अपना साक्षात्कार दिया और वापस आ के इंताजर करने लगा।

थोड़ी देर बाद अंदर से एक आदमी के हाथ में चुने हुए आवेदकों के नाम के साथ आया,

जिसमे राघव का नाम सबसे नीचे था,नीचे के साथ साथ राघव को उस कंपनी के सबसे बड़े पद के लिए चुना गया था।

कहीं न कहीं जूही भी राघव की काबिलियत से परचित थी।

और या फिर वो अपने उस गलती की भरपाई कर रही थी  जो कॉलेज के समय में उसने राघव के साथ किया था।

राघव खुश था पर उसके दिल मे कुछ और ही चल रहा  था,जहाँ सारे लोग एक दूसरे को बधाइयाँ दे रहें थे वहीं राघव शांत अपनी जगह पे बैठा हाथ मे एक तस्वीर को देख के मुस्कुरा रहा था।

वहीं अपनी आफिस में बैठी जूही राघव को देख रही थी।

तभी एक चपरासी राघव के पास आया,और उसे एक कागज का टुकड़ा पकड़ा के चला गया।

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“सॉरी राघव,मुझे तुमसे कुछ बात करनी है,और कल मैं कैफे में तुम्हारा इंतज़ार करूँगी।””

उस कागज में लिख के जूही ने राघव को दिया था।

राघव जरा सा मुस्कुराया और उठा अपना जरूरी कागज कंपनी के आफिस से लिया और बाहर निकला ही था कि एक बार फिर चपरासी वापस से उसके पास आया और उसे एक कार की चाभी पकड़ाते हुए बोला सर ये कंपनी के मैनेजर के लिए है।

राघव उसे शुक्रिया बोलते हुए चाभी ली और निकल गया।

और ये कोई इतेफाक नही है जो जूही का दिल पिघल गया है या उसने राघव को मिलने को बुलाया है।

ये तो राघव का जूही के प्रति जो प्रेम है वही कहीं न कहीं अब जूही के भी दिल में अंकुरित हो रहा था,और होता भी क्यों नहीं,जब जूही बीमार थी और कॉलेज नही आ रही थी तब राघव ही था जिसने जूही के सारे नोट्स बनाये थे सब कुछ भुला के बस राघव को याद था तो जूही के लिये उसके दिल का एहसास।

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12 दिसंबर 2017

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जूही जैसे ही कैफे पहुँची उसने देखा राघव पहले से ही बैठा है।

वैसे जूही बहुत चंचल लड़की है पर आज उसकी पलकों के बीच लज़्ज़ा की एक झलक दिख रही थी।

वो राघव के साथ किये गए अपने व्यवहार से बहुत शर्मिंदा है।

जूही अगले दो घण्टों में तीन कप कॉफी पी के दो चार बून्द आंसुओं के साथ अपने सारे गुनाहों का ज़िक्र राघव से की और सबके लिए माफी भी मांगी।

राघव जूही से गुस्सा नहीं है वो तो उसे बहुत पसंद करता है,और उसकी दीवानगी भी उस हद तक है जहाँ तक सूरज और चाँद का दिन और रात से है।

आज की इस कुछ घण्टे की मुलाकात के बाद दो दिलों के बीच के गिले शिकवे मिट गायें,और उनके बीच एक अजीब सा रिश्ता जुड़ने लगा वो रिश्ता वही रिश्ता है,

जिसकी कसिस में आज तक राघव जलता आ रहा था।

न राघव ने न ही जूही ने अभी तक एक दूसरे को कुछ भी बताया अपने दिल की बात।

अब मुलाकातें अक्सर ही हो जातीं है।

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28 दिसम्बर 2017

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वो कहते हैं न कि,””

अगर पूरी शिद्दत से किसी चीज को चाहो तो सारी कायनात आपको उससे मिलानें में जुट जाती हैं।””

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आज बारिस भी जूही और राघव के लिए एक वरदान बन के आयी है।

अक्सर तो इस महीने में कभी भी बारिस नही होती पर आज जाने क्यों बादलों को बरसने का शौक़ चढ़ा है

मानो बदल ने आज अपनी महबूबा धरती को पूरी तरह से भिगाने का सोच रखा है।

बदल और जमी के इस मिलन में अचानक दो दिल और सुलग उठें,और ऐसे दिल सुलगे हैं जिनके मोहब्बत की चिंगारी आज से से चार साल पहले सुलगी थी बारिस आये और जूही भीगे नही ऐसा कैसे हो सकता है,

ठंडी के मौसम में भी जूही बारिस में भींगती रही,और राघव अपनी कार में बैठा उसे देखे जा रहा था।

मानो वो जंगल का राजा हो और जूही कोई खूबसूरत मोरनी जो सावन के मौसम में सब कुछ भूल के पंख फैला के बस नाचे जा रही हो।

तभी अचानक जूही की नज़र राघव पे पड़ी,

वो उसके पास गयी और उसे खींच के गाड़ी से बाहर ले आयी और मौसम की खूबसूरती को दिखाने लगी,और इस बारिस में जो सबसे ज्यादा भीगा था, वो था जूही और राघव का दिल।

बारिस की टपकती बूंदों के बीच कब उन दोनों के अधरों का मिलन हो गया शायद ही उन दोनों को पता चला क्योकिं आज की इस बारिस ने न केवल अपनी महबूबा को भिगाया बल्कि उसने दो जिस्मों को भी उस हद तक भींगा दिया जिस हद तक शायद ही उन दोनों ने सोचा था,पर ये कायनात की चाहत थी कि अब और दूरी ना रहे एक दोनो के बीच और वो दूरी बारिस की ठंडी बूंदों में सुलगती दो सांसों के मिलन ने खत्म कर दी।

और शुरू कर दी मोहब्बत की एक ऐसी दास्तान जो दो जिस्म एक जान बन चुके हैं।

और इस तरह बिना बोले मेरे दोस्त राघव ने अपने इश्क को पा लिया।

आज दोनो एक साथ आफिस जातें हैं।

मैं भी कभी कभी उनसे मिलने जाता हूँ।

पिछली बार मुझे याद है जब मैं गया थ उनसे मिलने दोनो ने मुझे इतना ज्यादा खाना खिला दिया कि मैं दो दिन तक भूखा ही रहा।

पर राघव जूही के साथ जितना खुश दिखता है उतना शायद ही वो कभी था।

और सबसे बड़ी बात दोनो के प

मम्मी पापा को उनके रिश्ते के बारे में पता है।।

जाते जाते कुछ पंक्तियाँ याद आ रही हैं—-

.

“”देखा था मौसम को पिघलते हुए मैंने बारिस में,

देखा था इश्क को मचलते हुए बारिस में,

देखा था “सूरज” जमी को निखरते हुए बारिस में।””

CopyrightSuraj Sharma

इश्क़ (राघव जूही की कहानी)

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राघव बहुत प्यार लड़का है।

राघव छोटे कद है इस लिए अक्सर लोग उसके कद का मज़ाक बनातें हैं।

पर अक्सर उसे इस बात की परवाह नही होती क्योंकि

उसे लगता है कि इंसान की पहचान उसका शरीर नही बल्कि उसका व्यक्तित्व है।

और राघव का व्यक्तित्व तो हर आम लड़कों से कहीं ज्यादा प्यार है।

और ऊपर से राघव पढ़ाई में पिछले साल ही उसे बेस्ट स्कॉलर बॉय का इनाम मिला है।

इस लिए राघव अपनी पढ़ाई में मस्त रहता है।

पर आज राघव को एक चीज़ से नफरत हो गयी है,वो है उसके कद से।

राघव आज बहुत परेशान है अपने कद को लेकर,

और उसकी इस परेशानी की वजह जूही है।

हाँ जूही,

जूही हमारे कॉलेज की बससे खूबसूरत लड़की है,

उसकी स्टाइल पे कॉलेज का हर लड़का फिदा है।

और सच कहूँ तो कभी कभो मैं भी उसकी खूबसूरती पे फिदा हो गया था पर राघव तो उसका दीवाना है।

राघव जूही को मन ही मन बहुत पसंद करता है।

पिछले दिन जब राघव लायब्रेरी में पढ़ रहा था,तभी जूही भी वहाँ आयी थी। जूही–हेलो राहुल, क्या तुम मेरी मैथ में हेल्प कर दोगे।दरअसल मेरा न एक भी नोट्स नही तैयार है? और मुझे याद है राहुल,मैं और राघव  साथ ही बैठें थें,

और कैसे राघव राहुल के कुछ बोल पाने से पहले ही 

हाँ,हाँ जूही क्यों नही मैं ही कर दूंगा तुम्हारी हेल्प।,,,राघव
और राघव के इतना कहते ही उस लायब्रेरी के टेबल पे जो तूफान आया था,

राघव उसकी आंधी में अभी भी उड़ रहा है गुमनाम सा। दरअसल,राघव के इतना बोलते ही। जूही गुस्सा हो गयी और उसने राघव से गुस्से में बोल,,, राघव लुक तुम अपनी हद में रहो,और ज्यादा मुझपे डोरे ढलने की कोशिश ना,

करो बौना कही का मेरी हेल्प करेगा।

जूही माथुर की हेल्प लड़ेगा। और इतना कह कर जूही वहाँ से तुरन्त चली गयी पर राघव को एक ऐसा घव दे गई जिसको दुनिया का कोई भी डॉक्टर नही भर सकता है। मैंने भी राघव को बहुत समझया पर वो किसी से बात ही नही कर रहा।

बस वो चल तो रहा है पर एक बेजान की तरह।
और हो भी क्यों ना वो जूही को तब से पसन्द करता है जब से उसने इस कॉलेज में अपना पहला कदम रखा है।

और आज दो साल हो गयें हैं साथ साथ एक ही क्लास रूम में उसे देखते हुए।
पर उस दिन की घटना के बाद राघव अपने आप से नाराज़ और नाखुश सा है। और उसके इस दर्द का परिणाम उसके टेस्ट में भी दिखा पिछले दो सालों में ये पहली दफा है,

जब राघव ने किसी पढाई के क्षेत्र में इतने कम मार्क्स पाये हैं।

उसने टेस्ट में महज़ पासिंग मार्क्स पाया है,फिर भी उसे कोई फर्क नही है इस बात का।उसे बस आज कल अपने कद की फिक्र है,प्रोफेसर भी उसे पूरी क्लास के सामने पूछ चुके हैं,

राघव तुम्हारे कम मार्क्स कैसे आयें पर राघव ने कुछ भी जवाब नही दिया।

बस खड़ा हुआ और दुबारा से अपनी शीट पे बैठ गया।

पिछले दो दिन से वो हमारे साथ कैंटीन में भी नही आया है।

और कल तो मुझे उसकी मम्मी का भी कॉल आया था राघव के बारे में पूछ रहीं थीं ऑन्टी।

उन्होंने भी राघव के आज कल बदले व्यवहार से चिंता हो रही है,

पर मैंने उन्हें बोला कोई चिंता की बात नही है,सब ठीक है।

लेकिन मुझे पता है कि कुछ भी ठीक नही है।

राघव की परेशानी और फिर आज कहानी में आया एक नया मोड़ जाने क्या चाहता है।

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20/1/2016

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राघव रोज़ की तरह शांत कॉलेज आया,

उसके साथ मैं भी था क्योकिं वो मेरी ही बाइक पे आता है कभी कभी राघव अपनी कार लाता है।

राघव का परिवार एक धनी परिवार है,

अब मेरे पापा के पास इतने पैसे तो नही है कि वो मुझे कार दे कॉलेज के लिए,और बाइक भी मैंने कितनी मसक्कत के बाद पायी है वो तो मुझे पता है या फिर मेरे पापा मम्मी को।

पर मुझे याद है उन्होंने मुझे बाइक 75% के ऊपर लाने पे दिलवाई थी वो भी बहुत कहने पर।

पर राघव के बारे में ऐसी कोई बात नही है,उसे तो कार बारहवीं के बाद कॉलेज के पहले ही साल मिल गयी थी,बर्थडे पे।

और वो पहले दिन की ड्राइविंग मुझे वो भी बहुत अच्छे से याद है कि राघव ने सबसे पहले अपनी कार खुद न चला के मुझे उसकी चाभी दी थी।

अरे हम दोनों भूख दो पेटों की और खाना एक थाली के हैं।

तो मेरी सो स्मार्ट बाइक पे हम दोनों एक दम से नार्मल तरीके से आ के कॉलेज में रुकें,

और जैसे ही राघव बाइक से उतरा और मैं बाइक पार्क करने गया,

तभी वहाँ पे जूही अपनी फ्रेंड के साथ आ धमकी,

राघव के सामने आ के खड़ी हो गयी।

मैं बाइक को जैसे तैसे स्टैंड पे लगाया और राघव से थोड़ी दूरी पे आ के घड़ा हो गया।

राघव बड़े सहज भाव से बोला,

हेलो जूही कैसी हो आप?

मैं अच्छी हूँ,तुम बताओ राघव,जूही ने एक अलग ही स्वर में जवाब दिया।

आज के पहले जूही को इतना मीठा बोलते शायद ही मैंने कभी सुना था,अरे मैंने क्या कोई भी नही सुना था।

अरे हम भी अच्छे हैं,राघव ने मुस्कुरा के जवाब दिया।

सुनो राघव उस दिन के लिए सॉरी यार मैंने तुम्हें जो कहा शायद मुझे नही कहना चाहिए था,-

जूही राघव से माफी माँगतें हुई बोली।

मेरी तो कुछ भी समझ मे नही आ रहा था आखिर ये हो क्या रहा है,

सब कुछ मेरी समझ से बाहर था।

पर एक बात तो मुझे पता 

थी ।पर एक बात तो मुझे पता 

था कि राघव तो जूही से नाराज़ नही है,पर जूही राघव से आ के माफी मांग रही है,

ये किसी फिल्मी ड्रामा से कम नही था,क्योकि जूही वो लड़की है जो आज तक किसी से माफी नही मांगी थी बल्कि अगर उसे हम फायर गर्ल कहें तो गलत नही होगा,

जाने कितने लड़के उसके हाथों से अभी तक थप्पड़ खा चुके थे पर राघव को उसने सॉरी बोला ये बहुत बड़ी बात है। पर एक चीज जो सबसे अच्छी थी वो ये की राघव बहुत खुश था आज,

आज मुझे वो पहले वाला राघव फिर से मिल गया था,

इस लिए मैंने भी सब कुछ छोड़ के राघव के पास एक दोस्त की तरह ही पहुंचा और उसकी खिचाई की।

.

क्या बात है,राघव जी आज तो चेहरे पे अलग ही मुस्कुराहट है,

मैंने उसे छेड़ते हुए पूछा। नही नही भाई आपको तो पता ही है कि मैं जूही जी को कितना पसन्द करता हूँ,-

राघव के इन शब्दों में आज अलग ही ध्वनि थी।

वो कहते हैं ना-

.

“इश्क में दर्द भी,

ग़ालिब किसी सुकून से कम नही है।””

.

वही हाल मेरे अजीज़ दोस्त राघव का भी आज था।

कहानी में आये इस मोड़ से तो हम सभी हैरान थे पर राघव खुश था।

आज उसने पार्टी भी दी हम दोस्तो को उसी पुरानी रामू चाचा की ज़ायकेदार चाय की जिसे हम पिछले दो  सालों से हर खुशी के पल में पीते आ रहें हैं।

रामू चाचा की चाय का मज़ा लखनऊ के बड़े से बड़े रेस्टोरेंट की कॉफी में भी नही थी।

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22/1/2016

.

अब तक मेरे अज़ीज दोस्त राघव और उनकी जूही का जो मेल हुआ वो बात पूरे कॉलेज में फैल चुकी थी,

किसी को भी इस पर आसानी से भरोसा नही हो रहा था।

पर था तो यही सच।

वहीं जूही की दोस्त भी हैरान थीं,जूही और माफी।

आज सुबह राघव अपनी कार लेके आया था,पर उसने आज मुझे फोन कर के बोला था कि आज वो जूही को उसके घर से लेके आएगा,

इस लिए आज मैं भी अपनी बाइक पे अकेले आया।

जूही और राघव एक साथ कॉलेज कार से आये।

राघव और वो दोनों लायब्रेरी चले गयें शायद कोई काम रहा होगा,

और मैं भी ठहरा कुछ लीडर मिज़ाज़ का लड़का,और होता भी क्यों न मेरे पापा भी तो मेरे गाँव के प्रधान हैं।

तो नेताओं वाला गुण तो खानदानी है मुझमें,

तो मैं भी अपने लड़कों के साथ करने लगा इधर उधर की नेतागिरी और एक दो शायरी भी समय समय पे कर दिया करता था।

हमारे इस बार के डीन कुछ ज्यादा ही खड़ूस और पुराने ख्यालातों वालें थें।

इस बार उन्होंने एक शर्त रखी थी कि कॉलेज में वेलेंटाइन डे की पार्टी तभी होगी,

जब सारे बच्चे उनके द्वारा एक टेस्ट में पास होंगें।

इस नए नियम से सबसे ज्यादा झटका जूही को ही लगा था।

इस नए नियम से सबसे ज्यादा झटका जूही को लगा था,क्योकिं वो कॉलेज फ़ेरवेल,वेलेंटाइनडे इस तरह की पार्टीयों के लिए आती ही थी।

उसको लेक्चर अटेन्ड किये हुए तो शायद ही पिछली बार किसी ने देखा हो,

उसका काम है कॉलेज आना और मज़े करना।

यही उसकी जिंदगी है,

और हो भी क्यों न जूही के पापा के पास इतने पैसे हैं,जितने में तो मेरे यहाँ पाँच बड़े अमीरों के होंगे,

जूही एक बहुत बड़े बाप की एक बहुत ही बिगड़ी हुई बेटी थी,

जूही को तो कभी का कॉलेज से निकल देते पर उसके पापा की वजह से वो कॉलेज में अब तक थी।

पर वो अक्सर डीन से झगड़े कर लेती थी,

पर जैसे ही डीन ने अपना नया नियम सुनाया सबसे पहले और सबसे ज्यादा हंगामा करने वाली लड़की एक मात्र जूही ही थी।

डीन भी जूही से बहुत नाराज़ हैं उसके व्यवहार को लेके।

राघव को भी इस बात का पता चला तो वो काफी परेशान हो गया,

अपने लिए नही जूही के लिए क्योकि राघव क्या पूरा कॉलेज जानता था कि जूही कैसी है पढ़ाई के मामले में।

अभी तक मुश्किल से उसके हर साल 55% आते रहें हैं,

वो भी दोस्तों की मदद से।

और फिर ये डीन का टेस्ट ये इसको पास करना बहुत मुश्किल था जूही के लिए।

पर राघव ने जूही को वादा किया कि वो उसे पढ़ायेगा और वो जरूर पास होगी।

वैसे भी इस टेक्स्ट का राघव के लिए भी बहुत मायने थें,क्योकि वेलेंटाइन डे पे ही वो जूही को अपने दिल की बात बताने वाला था।

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25/1/2016

.

आज जूही काफी खुश नजर आ रही थी,पता नही क्यो पर वो आज कुछ अलग ही चमक रही थी।

मैं और राघव पहले की तरह ही मेरी बाइक की मज़ेदार सवारी करके कॉलेज में अपने रुतबे की तरह की उतरा 

आज कल राघव के चेहरे पे भी अलग तरह की खुशी रहती है।

मेरा तो काम है कॉलेज आ के पहले एक बार पूरे कॉलेज की जानकारी इक्कठा करना,फिर अपने गैंग के साथ कैंटीन के दर्शन करना और फिर जा के क्लास रूम की तरफ प्रस्थान करना।

एक तो पोलिटिकल खानदान ऊपर से लखनऊ वाले तो ये तो लाज़मी था ना इतनी नेतागिरी करना।

ख़ैर छोड़ो मेरी बात।

.

हेलो राघव,जूही ने राघव की तरफ हाथ बढ़ाया।

हेलो,जूही जी,,,राघव जुहू से हाथ मिलाते हुए बोला।

राघव अगर आप बुरा न मानो तो,मेरा एक नोट शुक्ला जी के पास है,और कल टेस्ट है तो क्या आप उसे लायब्रेरी से ला के मुझे दे देगें।

मैं ऑडिटोरियम में मिलूंगी।,,,जूही ने राघव से पूछा।

हाँ जूही जी क्यो नही,हम अभी लाते हैं।,इतना कह के राघव नोट लेने चला गया।

जैसे ही राघव नोट लेके ऑडिटोरियम में पहुँच,तो उसने देखा कि वहाँ पे पहले से ही डीन और सारे प्रोफेसर ख़ड़े थें। राघव कुछ समझ पाता।

जूही पहले ही चिल्लाई,,,ये देखो ये है हमारा टॉपर जो एक चोर है।

ये आज तक सारी एग्जाम में यही करता है।

राघव को कुछ समझ आता कि डीन ने उसके हाथ मे पड़े पेपर छीन लिये।

ये कोई नोट नही था बल्कि ये तो वही पेपर थें जिसे डीन ने टेस्ट के लिए बनाया था।

किसी को कुछ समझ मे नही आ रहा था।

मैं भी वहाँ पहुँचा पर मुझे भी कुछ समझ मे नही आया,

वहीं एक तरह खड़ा राघव दूसरी तरफ डीन और जूही।

जूही फिर से चिल्लाई,,ये डीन और राघव की मिली भगत है।

डीन चोर है।

जूही तो ये सिर्फ राघव से अपने उस अपमान का बदला लेने के लिए कर रही थी,जो राघव ने उससे कैंटीन में उसकी कुर्सी छीन के की थी,

दरअसल जूही के स्वभाव से आप परचित तो होगें ही,तो कैंटीन से लेके क्लास रूम तक जूही की सीट फिक्स है।

कॉलेज का कोई भी लड़का और लड़की उसकी सीट पर नही बैठता है।

पर राघव ने ऐसा अपने कॉलेज के पहले ही दिन कर दिया था।

मौके के फायद उठा के जूही ने अपने उस अपमान का आज बदला ले लिया।

जूही की उस दोस्ती और माफी का यही कारण था।

ऑडिटोरियम का माहौल बहुत ही खराब था,

डीन जो कि राघव के चाचा थें,वो राघव के हाथ में पेपर देख के आग बबूला हो उठें।

डीन रामचंद्र सिंह बहुत स्वाभिमानी व्यक्ति थें,और वो राघव को भी बहुत अच्छी तरह से जानते थें।

वो जानते थें की राघव ऐसा नही कर सकता,क्योकि राघव भी बहुत ही स्वाभिमानी और मेहनती लड़का था।

उसने यूनिवर्सिटी में भी अपने ही दम से दाखिला लिया था।

आज तक कोई इस बात को नही जानता था कि डीन रामचंद्र राघव के चाचा हैं और वो चाचा जो राघव के स्वाभव और मेहनत से बहुत प्यार करतें हैं।

और ये राज भी राघव की उस एक गलती की वजह से खुला जिसे उसने जूही के साथ किया।

पर अभी तो जूही बस एक बात की रट लगाए हुए थी,कि चोर चाचा का चोर भतीजा देखो देखो!

डीन साहब गुस्से से आग बबूले हुए जा रहें थें,

उन्होंने जरा भी देरी ना करते हुए राघव को एक महीने के लिए बैन कर दिया।

राघव कुछ भी नही बोल पाया,वो चाहता तो अपनी सफाई दे सकता था और खुद को सही साबित कर सकता था पर नही।

और डीन साहब ने खुद भी बिना देर न करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

पिछले एक घंटे में उस ऑडोटोरियम में घटी हर एक घटना ने जहाँ एक परिवार को बिखेर दिया वहीं हर किसी के दिल मे डीन साहब की इज़्ज़त और बढ़ा दी।

साथ ही साथ जूही के प्रति मेरा गुस्सा और बढ़ गया।

CopyrightSuraj Sharma or love.shayar

First part is here.Wait for second part

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My sight and your eyes.
My chocolate and your bite,

My fast and your appetite.

My fault and your fight.
My mistake and your side.
My back and your weight,

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My touch and your shy.
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दोस्त क्या तुझे याद है!

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​अच्छा पता है तुझे,

कल मैंने मेरा पुराना एलबम खोला।

अरे वही एलबम,

जिसमें मैंने,तेरी मेरी पुरानी यादों को संजो के रखा है,

जिसमें मैंने तेरी हर क्यूट नॉटी हरकत को कैद कर के रखा है।

हाँ वही एलबम,

और फिर उस एलबम के साथ साथ,

मैंने तुम्हारी सारी यादें खोली।

अरे वही यादें जिसकी कशिश में मैं,

रोज़ जलती हूँ,

वही यादें जो मुझे मेरी जिंदगी से ज़्यादा प्यारी हैं।

और वही यादें जिसे मैं लेकर मरना चाहती हूँ।

अच्छा तुझे याद है,

जब हम पहली बार कॉलेज में मिले थें,

तूने मेरे जूते के लिए बोला था,कि

ये जूते यहां नही चलते।

और फिर हमारी दोस्ती हो गयी।

मैं तेरे घर और तू मेरे घर आने लगी

फिर देखते ही देखते दोस्ती हमारी दो जिस्म एक

जान वाली हो गयी।

अच्छा सुन ना,

तुझे वो तो याद ही होगा,

जब मैने तुझे गुलाब भेजा था,

और तेरी हॉस्टल की वॉर्डन को मिल गया था,

फिर तुझे बहुत डांट पड़ी थी।

यार तुझे पता है,

जिंदगी बहुत खुशहाल है आज भी है,

पर मैं खुश नही हूँ,

तेरे बग़ैर सारी खुशी मानो मुझे चुभती है।

तेरे संग गम भी बहुत छोटा लगता था,

पर तेरे बिना बस मैं अधूरी सी हो गयी हूँ।

तेरी मेरी दोस्ती कृष्ण सुदामा के जैसी है,

पर इसमें कृष्ण भी हम दोनों हैं,

और सुदामा भी हम ही दोनों है।

पता है कभी कभी मैं अब जब उदास होती हूँ,

तो बस यही जी करता है,कि

 एक बार तेरे कंधे पे सर रख के जी भर के रो लूँ।

पर तेरा कंधा नही मिलता,

तो तेरी फ़ोटो से लिपट कर रो लेती हूँ।

यार बस अब एक ही ख्वाइस है,

जब मेरी आखरी सांस निकले तो तू मेरे साथ हो।

क्योंकि तेरे साथ होने से मुझे किसी भी दर्द का एहसास नही होता।

और सुन,

तू गर कभी मैं इस दुनिया मे ना रहूँ तो रोना मत,

क्योकि मुझे तेरे होंठों पे हँसी पसन्द है,

आंखों में पानी नही।

और वैसे भी मैं मर के भी तुझमें जिंदा रहूंगी।

अरे मैं भी  बुद्धू हूँ,

तुझे तो याद ही होगा,

एक तू ही तो मेरी जान है,

फिर भला तू ये सब कैसे भूल सकती है।

अच्छा सुन ना,

चल एक बार फिर से उन लम्हों को जीते हैं,

फिर से एक दूसरे के गले लग के,

 एक दूसरे की धड़कनों को पढ़ते हैं।

चल फिर एक थाली में खा के पेट भरते हैं।

चल ना फिर से दो जिस्म एक जान बनते हैं।

Suraj Sharma ✍🙏

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(Soon male version will come.)

Yes,I love you!

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Yes,

I love you.

And,

I want to touch you ever.

I love your body smell more than a perfume.

And I love to listen your voice

more than any melody….

I want to share my pillow with you.

And

I want to say you “Goodnight” every night.

And  I want to wake up with your beautiful morning kiss.

Suraj Sharma ✍🙏

तुम मुझमें जिंदा हो! ( You are in my soul)

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​अरे जानती हो,

कल पुरानी किताबों को बेचने जा रहा था मैं,
उन किताबों में एक किताब मिली मुझे।

जो वर्षों से उस बोरी में बंद होने के,बाद भी

नई जैसी लग रही थी।

बस उसपे कुछ धूल जम गई थी।
मैंने धूल को साफ कर के,खोला तो

एक पन्ने पे तुम्हारा नाम लिखा था।
तुम्हारा ही नाम लिखा था,

और जानती हो,

उस सियाही में से तुम्हारे बदन की खुशबू भी आ रही थी।

अरे वही खुशबू,

जो कभी मेरे सांसों में घुल के मेरे रक्त को

भी तेरे संग संग बहना सिखाया था,

अरे वही खुशबू,

जिसकी महक शायद आज के किसी परफ़्यूम में नही है।

और जानती हो,

कल से तुम बहुत याद आ रही हो,

कल से मुझे वो कॉलेज,वो कैंटीन ,वो बस,

और सबसे ज्यादा तो 

कॉलेज के रास्ते मे पड़ने वाली वो 

मोहन की,

चाय की दुकान याद आ रही है।

तुम्हें याद तो होगा ही ना,

हम अक्सर कॉलेज से लौटते वक्त,

वहाँ पे चाय पिया करते थें।

और तुम्हें ये भी तो याद होगा ना,कि 

हमने पहली बार किश वही पे किया था।।

अच्छा सुना ना,

कल मुझे वो सर भी याद आये थें,

जो अक्सर हमें क्लास से बाहर निकल देते थें,

और हम मज़े से जा कर लायब्रेरी में बैठ कर,

एक दूसरे को देखतें थें।

और क्या तुम्हें वो भी तो याद होगा,

जब मेरा फोन तुम्हारी मम्मी ने उठा लिया था,

और मैंने उन्हें जानू बोल दिया था,

और तुमको चार दिन कॉलेज नही आने दिया था।

अरे हाँ जानती हो,

एक बात तो तुमसे बताना मैं भूल ही गया,

कल जब उस किताब को आगे पलटा,

ना तो उसमें तुम्हारा एक ख़त भी मिला,

जिसमें तुमने रात भर जग के,

 मेरे लिए ढेर सारा दिल बनाया था,

और जिसमे तुमने लिखा था,

हम कभी एक दूसरे से दूर नही होंगें।

और जानती हो,

कल उस ख़त को पढ़ के,

मैं राधे कृष्ण के उस मंदिर में भी गया था,

जहाँ हमने एक दूसरे से कभी ना बिछड़ने की

कसम खाई थी,

और जहाँ पे तुमने एक बार फिर से मुझे,

भगवान के सामने प्रोपोज़ किया था।

अरे तुम ठीक कहती थी,

मैं ना एक नंबर का पागल हूँ,

अब तुम ही बताओ,

जब तुम इतने सालों किसी भी दिन मेरे 

ख़्वावों में आना नही भूली,तो

इन सब बातों को कैसे भूल जाओगी।

अच्छा सुनों,

मैं कल जरा भी नही रोया था,

तुम्हें याद करके।

तुमने ही कहा था ना कि,

तुम मर के भी मुझमें जिंदा रहोगी।

और तुम नही चाहती कि मैं तुम्हें याद

करके रोऊँ,

और हमारा प्यार झूठा हो जाये,

तू देख लो मैं कल भी नही रोया था,

आज भी नही रोया हूँ।

और मैं तो तब भी नही रोया था,

जब तुमको अपनी गोद मे उठा के,

 कब्र तक ले गया था।

अच्छा सुनों अब रात को मिलना,

मैं तुम्हें सब कुछ बताऊंगा।

Suraj Sharma ✍🙏

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